Monday, October 11, 2010

एक ज़हर और है मेरे भाई ,ये बहुत बड़ा और खराब ज़हर है ,ये है अनदेखी ,या लापरवाही का ज़हर ,जब छोटे छोटे विद्रोह दबा दिए जाते हैं या अनदेखे हो जाते हैं ,तो बहुत बड़ा ज्वालामुखी फट जाता है ,जैसे हम सभी के घर में ,परिवार में कोई समझौता करते करते बड़ा हो जाता है या ज्यादा ज़िम्मेदारी निभाता है और हम उसके सुख का कोई ध्यान नहीं देते न उसके सम्मान उसकी रुचियों का ख्याल रखते हैं.वोह हमारा भाई लड़का या बीवी कुछ भी हो सकता है .जो हमारे घर कि चीज़ें, दीवारों को प्राण देते हैं .ध्यान दो आप[के घर में कोई न कोई ऐसा ज़रूर होगा

1 comment:

  1. हम्म!! ब्लॉग अपडेट करिये...नियमित लिखिये, शुभकामनाएँ.

    ReplyDelete