आज बस इतना ही..........
कडकती धूप मे कुछ छांह मुझे दे जाये
ना ऐसा पेड़ कोई जिंदगी मे बो पाया
मेरे खुदा तू अब तौ मुल्क को तरक्की दे
खून बच्चों का और न हो जाया
हो गयी देर अब ' विवेक ' को घर जाने दो
घर है सूना ना आ जाये कोई गम का साया
------------विवेक मचान
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

सुन्दर पंक्तियाँ! हमें छायादार पेड़ नहीं मिला तो हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसा इच्छित पेड़ बोने का प्रयास करना होगा।
ReplyDeleteघुघूती बासूती